साथ निभाने का वादा कर
क्यों मुझे छोड़ के चली गयी
सपनों के अधूरे महल बनाकर
क्यों उन्हें तोड़ गयी......
माना मैं तुम्हारे काबिल नहीं
पर मैं कोई गैर भी तो नहीं...
क्या कमी रह गयी थी मुझसे
फिर क्यूँ आज
दिल में होकर भी कहीं दूर हो मुझसे...
जिस तरह मुझे छोड़ गयी हो
खुदा न करे कोई तुम्हे छोड़ जायेगा
पर इतना कह सकता हूँ
जितना प्यार मैंने तुम्हे दिया
कोई और नही दे पायेगा ......
क्यों मुझे छोड़ के चली गयी
सपनों के अधूरे महल बनाकर
क्यों उन्हें तोड़ गयी......
माना मैं तुम्हारे काबिल नहीं
पर मैं कोई गैर भी तो नहीं...
क्या कमी रह गयी थी मुझसे
फिर क्यूँ आज
दिल में होकर भी कहीं दूर हो मुझसे...
जिस तरह मुझे छोड़ गयी हो
खुदा न करे कोई तुम्हे छोड़ जायेगा
पर इतना कह सकता हूँ
जितना प्यार मैंने तुम्हे दिया
कोई और नही दे पायेगा ......
worthy work to b done in a class!!!
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