तन्हाई में किसी की तलाश है ,
भीड़ में भी अपने की आस है,
अनजानों क बीच अपना कोई खास है,
फिर क्यों ये दिल उदास है ...
कोई कहता ये प्यार है ,
कोई कहता दिमागी बुखार है ,
दिल और दिमाग में कैसी तकरार है,
फिर भी न जाने क्यों इंतज़ार है ...
आज भी उसके लौटने की आस है ,
आज भी उसके जवाब का इंतज़ार है .....
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