क्यों तुम्हारे बिन,
सब अधूरा सा लगता है
क्यों तुम्हारे बिन ,
ये पागल बैचैन सा रहता है
क्यों तुम्हारे लिए,
ये सपने संजोता है
क्यों तुम्हारे दर्द को,
अपना समझता है |
जवाब होते हुए भी ,
तुम क्यों अनजान बनती हो
कुछ पल के लिए ही सही,
इसे अपना मान कर के तो देखो |
वो कभी नहीं कहता की,
वो तुम्हारे लिए कुछ भी कर जायेगा
पर हर मुश्किल घड़ी में ,
तुम्हारा साथ निभाएगा,
तुम्हारे आंसुओं को पोंछने ज़रूर आएगा,
तुम्हारे होटों पे मुस्कान बिखेर कर ही जायेगा |
तुम ये मत समझना की ,
आज तुम्हारे लिए पागल है ,
कल किसी और के लिए हो जायेगा ,
वो तुम्हारे लिए पागल है ,
वो तुम्हारा ही पागल रह जायेगा |