Thursday, June 30, 2011

लाख कोशिशें करता हूँ
तुमसे नफरत करने की 
लाख कोशिशें करता  हूँ
तुम्हे भूल जाने की |

मैं डरता था
ये शायद होगा एक दिन 
मैं डरता था
तुम्हे खोना होगा एक दिन |

चाह कर भी 
तुम्हे दोष नही दे पता
चाह कर भी 
कुछ समझना नहीं चाहता |

नहीं जानता था 
इतना मुश्किल होगा मेरे लिए
न ही जानता था 
इतना आसान होगा तुम्हारे लिए |

भुलाना चाहूँ तो भी 
तुम्हारी हंसी याद आती है 
भुलाना चाहूँ तो भी 
तुम्हारी हरकतें याद आती है |

सोचा न था
सब कुछ अचानक इस तरह
सोचा न था
एक झटके में ही सब कुछ |

न चाहते हुए भी 
तुम्हारा ख्याल रहता है 
न चाहते हुए भी 
तुम्हारा इंतज़ार रहता है |

Tuesday, June 28, 2011

कुछ यादों के मोती
हम संजों लाये थे
सोचा था साथ बैठ कर 
एक धागे में इन्हें पिरोएँगे |

कल के अतह सागर से
ये मोती चुरा लाये थे
उन खुबसूरत पलों को
दोबारा जीने का मन बना आये थे |

एक एक मोती
दर्द में मुस्कान बन जाती है 
पर यही मोतियाँ  ही तुमसे
दूर होने का एहसास दे जाती है | 
सपनों की चाहत में
अपनों से दूर चले आये
अपनी ख़ुशी के लिए 
दूसरों को रुला आये |

जिनकी ऊँगली थामी थी हमने
जिनकी गोद में खेला था हमने
आज उनसे मुँह मोड़ आये
आज उनका ही साथ छोड़ आये |

जिनका वक़्त सिर्फ हमारे लिए था
हमारे पास उनके लिए वक़्त नहीं 
जिनका सब कुछ हम थे
आज हमे उनकी क़द्र नहीं  |
आज हमे उनकी बातें 
बोर लगने लगी
उनकी सलाह हमे 
शोर लगने लगी |

अरे यार !!!

कभी उनकी ज़मीन पे 
खड़े हो के तो देखो
कभी उनकी मनाही को
समझ के तो देखो |

तुम्हारी जिद के लिए 
अपनी ख़ुशी दबा बैठे थे वो 
हमारी नींद के लिए 
अपनी नींद गवां बैठे थे वो |

इनके लिए अपने बेशकिमती पल 
निकाल के तो देखो 
इनके होटों पे तो कभी 
मुस्कान बिखेर के तो देखो |