Monday, April 18, 2011

क्यों तुम्हारे पास होने से
दुनिया हसीन सी लगती है 
क्यों तुम्हारे न होने से
गमगीन सी लगती है 

क्यों तुम्हारे इनकार पर 
इतना प्यार आता है 
क्यों तुम्हारे इकरार पर
मर जाने को जी चाहता है 

क्यों तुम्हारे इंतज़ार में लम्हे
बरसों से लगते हैं
क्यों तुम्हारे साथ बिताये लम्हे
एक पल से भी कम लगते हैं 

क्यों तुम्हारी ख़ामोशी 
मुझे खूब भाती है
क्यों तुम्हारी हंसी
सपनो में ले जाती है 

मेरे सवालों का जवाब 
सिर्फ तुम्हारे पास है 
इस पागल को तो अब बस
तुम्हारे 'हाँ' का इंतज़ार है ...... 

Saturday, April 9, 2011

तुम्हारा ये दीवाना
आज भी उतना ही पागल है 
जितना वो कल था ..

तुम्हारा ये दीवाना
आज भी उतना ही घायल है 
जितना वो कल था ..

तुम्हारे इंतज़ार में 
बाहें फैलाए 
वैसे ही खड़ा है
जैसे वो कल था..

तुम्हारे इंतज़ार में
पलके बिछाए 
वैसे ही खड़ा है 
जैसे वो कल था ..

वो आज भी 
उतना ही पागल है 
जहाँ तुम उसे छोड़ गयी थी ..

वो आज भी 
तुम्हे उतना ही चाहता है 
जहाँ तुम उसे छोड़ गयी थी ....

Monday, April 4, 2011

माना तुम्हे मुझसे प्यार नही
पर मेरे प्यार से खेलो नही
माना तुम्हे मेरा ख्याल नहीं 
पर मेरे ख्यालों से खेलो नही ..

सबकुछ जानते हुए भी
क्यों अनजान बनती हो
जानती हो मैं सिर्फ तुम्हे चाहता हूँ
फिर क्यों किसी गैर को 
चाहने के लिए कहती हो..

तुम्हारा क्या है
आज मैं तुम्हे चाहता हूँ
कल कोई और भी चाहेगा
पर इस पागल का दिल
आज अगर टूट गया
शायद कल नहीं जुड़ पायेगा....