लहरों क साथ तो कई हैं ,
लहरों को मोड़ दूँ ,
तो क्या बात है ..
आसमान को छूने के लिए तो कई हैं ,
आसमान को झुका दूँ,
तो क्या बात है ..
रास्ते तो कई हैं ,
मंजिल को पा लूँ ,
तो क्या बात है ..
राही तो कई हैं ,
हमसफ़र को पा लूँ,
तो क्या बात है..
No comments:
Post a Comment