Tuesday, March 29, 2011

आज फिर उस दोराहे पे खड़ा हूँ
जहाँ से होकर कभी मैं गुजरा था 

ज़िन्दगी बार-बार
इस दोराहे पर क्यों ले आती है 
दोनों ही राहें 
कुछ खोने को मजबूर कर जाती हैं

चाह कर भी 
दोनों पर साथ नही चल सकता
पर एक पर चलने के लिए
खुद को मजबूर भी नहीं कर सकता

ज़िन्दगी क्यों मेरे साथ
ऐसा मजाक कर जाती है 
ऐसे दो राहों पर बार-बार
मुझे क्यों ले आती हैं..... 

Sunday, March 20, 2011

कुछ पलों की ख़ुशी के लिए
चंद मीठे बोल वो बोलकर चली गयी
मेरी राहों को मोड़कर
अपने वादों को तोड़ चली गयी ....

उसके मीठे बोल और वादों को
मैं पागल,  प्यार समझ बैठा 
सबकुछ भुलाकर
उससे अपना मान बैठा...

आज न जाने वो कहीं बैठी
मेरे हालात पर हँस रही होगी
मुझे दर्द और घुटन में छोड़कर 
खुद हँसकर ख़ुशी से झूम रही होगी...

मुझे शिकायत
उससे नहीं,
खुद से है 
इस पागल से है
जो उससे अपना समझ बैठा..... 

Monday, March 7, 2011

अनजाना सा रिश्ता बन गया है तुमसे
दूर होकर भी पास हो मुझसे,
आँखें बंद करने पर 
तुम ही नज़र आती हो ,
आँखें खोलता हूँ
न जाने कहाँ खो जाती हो ,
दूरियों के बीच 
ये दिल तुमसे मिलने को मचलता है ,
पर इन दूरियों के बीच ही कहीं 
तुम्हे सुन  कर ही कुछ चैन मिलता है ,
अब तो तुम्हारी यादें ही 
मेरे होटों पे मुस्कान बिखेरती है ,
अब तो तुम्हारी बातें ही 
उदासी की धूप में छाँव देती हैं,
न जाने क्यों 
मैं यह सब लिख रहा हूँ ,
आज न जाने क्यों 
मैं अपने दिल की बात सुन रहा हूँ ....