आज कुछ कहना चाहता हूँ
कुछ सच बयां करना चाहता हूँ
लोग मेरी कविता को मेरा दर्द समझते हैं
सच है, वे कुछ गलत नहीं कहते
कहते हैं दर्द बाँटने से घटता है
पर मेरा कुछ दर्द मेरी शब्दों में झलकता है ..
क्यों किसी से अपना दर्द बाटूँ
उसका दर्द कम नहीं
जो उस पर अपने का बोझ डालूं
यही सोचकर अपने दर्द को शब्दों में पिरोता हूँ
शब्दों से खेलकर कुछ देर हँसता हूँ..
कोई तो इन शब्दों की हक़दार है
पर आज भी उसका इंतज़ार है
दर्द यह नहीं की वो मुझसे दूर है
दर्द यह है की इन शब्दों की हक़दार
कल की तरह आज भी कोई नही है....
कुछ सच बयां करना चाहता हूँ
लोग मेरी कविता को मेरा दर्द समझते हैं
सच है, वे कुछ गलत नहीं कहते
कहते हैं दर्द बाँटने से घटता है
पर मेरा कुछ दर्द मेरी शब्दों में झलकता है ..
क्यों किसी से अपना दर्द बाटूँ
उसका दर्द कम नहीं
जो उस पर अपने का बोझ डालूं
यही सोचकर अपने दर्द को शब्दों में पिरोता हूँ
शब्दों से खेलकर कुछ देर हँसता हूँ..
कोई तो इन शब्दों की हक़दार है
पर आज भी उसका इंतज़ार है
दर्द यह नहीं की वो मुझसे दूर है
दर्द यह है की इन शब्दों की हक़दार
कल की तरह आज भी कोई नही है....