Tuesday, January 25, 2011

साथ निभाने का वादा कर
क्यों मुझे छोड़ के चली गयी
सपनों के अधूरे महल बनाकर
क्यों उन्हें तोड़ गयी......

माना मैं तुम्हारे काबिल नहीं
पर मैं कोई गैर भी तो नहीं...

क्या कमी रह गयी थी मुझसे
फिर क्यूँ आज
दिल में होकर भी कहीं दूर हो मुझसे...

जिस तरह मुझे छोड़ गयी हो
खुदा न करे कोई तुम्हे छोड़ जायेगा
पर इतना कह सकता हूँ
जितना प्यार मैंने तुम्हे दिया
कोई और नही दे पायेगा ......

Saturday, January 8, 2011

अपनों के ताने-बाने से
एक धागा टूट गया,

कोई अपना इस अंधी दौड़
में कहीं पीछे छुट गया ,

अनजाने भीड़ से बचते हुए
न जाने कहाँ खो गया ,

ज़माने को क़दमों तले रखने का बोझ
अकेले मुझ पर छोड़ गया ,

साथ मुसीबतों का सामना करने
का वादा कर न जाने कहाँ खो गया,

एक दुसरे को पीछे छोड़ने की चाह में
वो बेचारा कहीं पीछे छूट गया ,

समय के तूफ़ान से जूझते हुए
कहीं एक धागा टूट गया ............

Friday, January 7, 2011

आज क्यों लौट आई तुम मेरे पास
जब मैं छोड़ चूका था ,तुम्हारे लौटने की आस,
क्यों मेरे जख्मों को हरा कर दिया
मेरी वफ़ा का तुमने अच्छा सिला दिया,
आज कैसे मैं तुम्हे अच्छा लगने लगा
जो कल तक तुम्हारी खूबसूरती पे दाग लगा,
आज क्यों तुम मुझसे मिलने को तड़प रही हो
अब जा कर तुम मेरे दर्द को महसूस कर रही हो,
क्यों मुझसे बात करने को मचल रही हो
अब तुम मेरे मन के हलचल को समझ रही हो...

पर आज क्यों तुम्हारा हाथ थामूं
जो कभी न आये थे पोंछने मेरे आंसूं....

आज क्यों तुम्हारे साथ चलूँ,
आज कैसे तुम्हे अपना मान लूँ,
आज कैसे तुम्हारा यकीन कर लूँ,
कैसे मैं सब कुछ भुला दूँ...

मैं आज भी तुम्हारा ही हूँ
पर कैसे मैं तुम्हे अपना मान लूँ ....

Tuesday, January 4, 2011

तन्हाई में किसी की तलाश है ,
भीड़ में भी अपने की आस है,
अनजानों क बीच अपना कोई खास है,
फिर क्यों ये दिल उदास है ...

कोई कहता ये प्यार है ,
कोई कहता दिमागी बुखार है ,
दिल और दिमाग में कैसी तकरार है,
फिर भी न जाने क्यों इंतज़ार है ...

आज भी उसके लौटने की आस है ,
आज भी उसके जवाब का इंतज़ार है .....
लहरों क साथ तो कई हैं ,
लहरों को मोड़ दूँ ,
तो क्या बात है ..

आसमान को छूने के  लिए तो कई हैं ,
आसमान को झुका दूँ,
तो क्या बात है ..

रास्ते तो कई हैं ,
मंजिल को पा लूँ ,
तो क्या बात है ..

राही तो कई हैं ,
हमसफ़र को पा लूँ,
 तो क्या बात है..