आज क्यों लौट आई तुम मेरे पास
जब मैं छोड़ चूका था ,तुम्हारे लौटने की आस,
क्यों मेरे जख्मों को हरा कर दिया
मेरी वफ़ा का तुमने अच्छा सिला दिया,
आज कैसे मैं तुम्हे अच्छा लगने लगा
जो कल तक तुम्हारी खूबसूरती पे दाग लगा,
आज क्यों तुम मुझसे मिलने को तड़प रही हो
अब जा कर तुम मेरे दर्द को महसूस कर रही हो,
क्यों मुझसे बात करने को मचल रही हो
अब तुम मेरे मन के हलचल को समझ रही हो...
पर आज क्यों तुम्हारा हाथ थामूं
जो कभी न आये थे पोंछने मेरे आंसूं....
आज क्यों तुम्हारे साथ चलूँ,
आज कैसे तुम्हे अपना मान लूँ,
आज कैसे तुम्हारा यकीन कर लूँ,
कैसे मैं सब कुछ भुला दूँ...
मैं आज भी तुम्हारा ही हूँ
पर कैसे मैं तुम्हे अपना मान लूँ ....
heyy,wow....i cant biliv its wdout inspiration...
ReplyDelete