Tuesday, June 28, 2011

सपनों की चाहत में
अपनों से दूर चले आये
अपनी ख़ुशी के लिए 
दूसरों को रुला आये |

जिनकी ऊँगली थामी थी हमने
जिनकी गोद में खेला था हमने
आज उनसे मुँह मोड़ आये
आज उनका ही साथ छोड़ आये |

जिनका वक़्त सिर्फ हमारे लिए था
हमारे पास उनके लिए वक़्त नहीं 
जिनका सब कुछ हम थे
आज हमे उनकी क़द्र नहीं  |
आज हमे उनकी बातें 
बोर लगने लगी
उनकी सलाह हमे 
शोर लगने लगी |

अरे यार !!!

कभी उनकी ज़मीन पे 
खड़े हो के तो देखो
कभी उनकी मनाही को
समझ के तो देखो |

तुम्हारी जिद के लिए 
अपनी ख़ुशी दबा बैठे थे वो 
हमारी नींद के लिए 
अपनी नींद गवां बैठे थे वो |

इनके लिए अपने बेशकिमती पल 
निकाल के तो देखो 
इनके होटों पे तो कभी 
मुस्कान बिखेर के तो देखो |

1 comment:

  1. dis z sunthng new,u changed d flavour finally
    GOOD 1...:)

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