सपनों की चाहत में
अपनों से दूर चले आये
अपनी ख़ुशी के लिए
दूसरों को रुला आये |
जिनकी ऊँगली थामी थी हमने
जिनकी गोद में खेला था हमने
आज उनसे मुँह मोड़ आये
आज उनका ही साथ छोड़ आये |
जिनका वक़्त सिर्फ हमारे लिए था
हमारे पास उनके लिए वक़्त नहीं
जिनका सब कुछ हम थे
आज हमे उनकी क़द्र नहीं |
आज हमे उनकी बातें
बोर लगने लगी
उनकी सलाह हमे
शोर लगने लगी |
अरे यार !!!
कभी उनकी ज़मीन पे
खड़े हो के तो देखो
कभी उनकी मनाही को
समझ के तो देखो |
तुम्हारी जिद के लिए
अपनी ख़ुशी दबा बैठे थे वो
हमारी नींद के लिए
अपनी नींद गवां बैठे थे वो |
इनके लिए अपने बेशकिमती पल
निकाल के तो देखो
इनके होटों पे तो कभी
मुस्कान बिखेर के तो देखो |
dis z sunthng new,u changed d flavour finally
ReplyDeleteGOOD 1...:)