कुछ यादों के मोती
हम संजों लाये थे
सोचा था साथ बैठ कर
एक धागे में इन्हें पिरोएँगे |
कल के अतह सागर से
ये मोती चुरा लाये थे
उन खुबसूरत पलों को
दोबारा जीने का मन बना आये थे |
एक एक मोती
दर्द में मुस्कान बन जाती है
पर यही मोतियाँ ही तुमसे
दूर होने का एहसास दे जाती है |
No comments:
Post a Comment