डर लगता है ,
परछाइयों से
पास आती हर एक आहट से |
डर लगता है ,
अँधेरे रास्तों से
उनके साथ होती ख़ामोशी से |
डर लगता है ,
ऊँचाइयों को छूने से
वहां पहुँच कर गिरने से |
डर लगता है ,
ख्वाहिशें पालने से
पूरे न होने के दर्द से |
डर लगता है,
उम्मीद भरी नज़रों से
खरा न उतर पाने की ग्लानी से |
डर लगता है,
आगे बढ़ते जाने से
भविष्य क गर्भ में
पल रही अनहोनी से ||
kitne dino baad likhe ho...aur itna darr ke kab se jeene lage ho??
ReplyDeleteHI SUJIT ! how r u???
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