Monday, April 18, 2011

क्यों तुम्हारे पास होने से
दुनिया हसीन सी लगती है 
क्यों तुम्हारे न होने से
गमगीन सी लगती है 

क्यों तुम्हारे इनकार पर 
इतना प्यार आता है 
क्यों तुम्हारे इकरार पर
मर जाने को जी चाहता है 

क्यों तुम्हारे इंतज़ार में लम्हे
बरसों से लगते हैं
क्यों तुम्हारे साथ बिताये लम्हे
एक पल से भी कम लगते हैं 

क्यों तुम्हारी ख़ामोशी 
मुझे खूब भाती है
क्यों तुम्हारी हंसी
सपनो में ले जाती है 

मेरे सवालों का जवाब 
सिर्फ तुम्हारे पास है 
इस पागल को तो अब बस
तुम्हारे 'हाँ' का इंतज़ार है ...... 

1 comment:

  1. very nice....
    If u don't mind ,I would like to use this poem for me.I think it suits better for the situation I'm in.

    ReplyDelete