Monday, April 4, 2011

माना तुम्हे मुझसे प्यार नही
पर मेरे प्यार से खेलो नही
माना तुम्हे मेरा ख्याल नहीं 
पर मेरे ख्यालों से खेलो नही ..

सबकुछ जानते हुए भी
क्यों अनजान बनती हो
जानती हो मैं सिर्फ तुम्हे चाहता हूँ
फिर क्यों किसी गैर को 
चाहने के लिए कहती हो..

तुम्हारा क्या है
आज मैं तुम्हे चाहता हूँ
कल कोई और भी चाहेगा
पर इस पागल का दिल
आज अगर टूट गया
शायद कल नहीं जुड़ पायेगा....


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