Sunday, March 20, 2011

कुछ पलों की ख़ुशी के लिए
चंद मीठे बोल वो बोलकर चली गयी
मेरी राहों को मोड़कर
अपने वादों को तोड़ चली गयी ....

उसके मीठे बोल और वादों को
मैं पागल,  प्यार समझ बैठा 
सबकुछ भुलाकर
उससे अपना मान बैठा...

आज न जाने वो कहीं बैठी
मेरे हालात पर हँस रही होगी
मुझे दर्द और घुटन में छोड़कर 
खुद हँसकर ख़ुशी से झूम रही होगी...

मुझे शिकायत
उससे नहीं,
खुद से है 
इस पागल से है
जो उससे अपना समझ बैठा..... 

2 comments:

  1. ब्लॉग जगत में आपका स्वागत
    भारतीय ब्लॉग लेखक मंच की तरफ से आप, आपके परिवार तथा इष्टमित्रो को होली की हार्दिक शुभकामना. यह मंच आपका स्वागत करता है, आप अवश्य पधारें, यदि हमारा प्रयास आपको पसंद आये तो "फालोवर" बनकर हमारा उत्साहवर्धन अवश्य करें. साथ ही अपने अमूल्य सुझावों से हमें अवगत भी कराएँ, ताकि इस मंच को हम नयी दिशा दे सकें. धन्यवाद . आपकी प्रतीक्षा में ....
    भारतीय ब्लॉग लेखक मंच

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  2. मुझे शिकायत
    उससे नहीं,
    खुद से है
    इस पागल से है
    जो उससे अपना समझ बैठा.....

    संवेदनशील अभिव्यक्ति...

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