अनजाना सा रिश्ता बन गया है तुमसे
दूर होकर भी पास हो मुझसे,
आँखें बंद करने पर
तुम ही नज़र आती हो ,
आँखें खोलता हूँ
न जाने कहाँ खो जाती हो ,
दूरियों के बीच
ये दिल तुमसे मिलने को मचलता है ,
पर इन दूरियों के बीच ही कहीं
तुम्हे सुन कर ही कुछ चैन मिलता है ,
अब तो तुम्हारी यादें ही
मेरे होटों पे मुस्कान बिखेरती है ,
अब तो तुम्हारी बातें ही
उदासी की धूप में छाँव देती हैं,
न जाने क्यों
मैं यह सब लिख रहा हूँ ,
आज न जाने क्यों
मैं अपने दिल की बात सुन रहा हूँ ....
Great one buddy.
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