Friday, December 10, 2010

आज जीना चाहता हूँ
इन जंजीरों से अलग होना चाहता हूँ
इस अंधी दौड़ से अलग होना चाहता हूँ
खुद को खुद से जोड़ना चाहता हूँ..

आज जीना चाहता हूँ
खुली हवा में सांस लेना चाहता हूँ
ठंडी लहरों में बहना चाहता हूँ
पेड़ों की तरह डोलना चाहता हूँ ..

आज जीना चाहता हूँ
नंगे पों घंस पे दौड़ना चाहता हूँ
अपने हाथों से कोमल कलियाँ छूना चाहता हूँ
कीचड़ में खिले कमल को पाना चाहता हूँ ..

आज जीना चाहता हूँ
सपनों में खोना चाहता हूँ
आँखें बंद कर दौड़ना चाहता हूँ
आज बंधनों को तोडना चाहता हूँ ...

...आज जीना चाहता हूँ ...

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